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Saturday, September 3, 2016

*लागणी ने ह्रदय नी जो भाषा मले , तो सबंधो ना साचा खुलासा मले.*

लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं

मैं न जुगनू हूँ, दिया हूँ न कोई तारा हूँ
रोशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यों हैं

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मुहब्बत का ही नहीं अमीरी का भी निशां है ताजमहल
ये बात और है कि प्यार तो मुफ़लिस भी किया करते हैं........

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दिल जित ले वो नजर हम भी रखते है,
भीड़ में नजर आये वो असर हम भी रखते है,
यु तो वादा किया है किसीसे मुस्कुराने का वरना आँखों में समंदर हम भी रखते है|

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दिल की हर बात ज़माने को बता देते है
अपने हर राज़ से परदा उठा देते है
चाहने वाले हमे चाहे या ना चाहे
हम जिसे चाहते है उस पर ‘जान’ लूटा देते है.....

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दिल की हर बात ज़माने को बता देते है
अपने हर राज़ से परदा उठा देते है
चाहने वाले हमे चाहे या ना चाहे
हम जिसे चाहते है उस पर ‘जान’ लूटा देते है.....

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कामयाबी कभी बड़ी नही होती,
पाने वाले हमेशा बड़े होते है.
दरार कभी बड़ी नही होती,
भरने वाले हमेशा बड़े होते है.
इतिहास के हर पन्ने पर लिखा है,
दोस्ती कभी बड़ी नही होती,
निभाने वाले हमेशा बड़े होते है…

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सब्र ....तहजीब है मोहब्बत की...!

और तुम समझते हो बेजुबान हूँ मैं...!!

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लागणी  ने  ह्रदय नी   जो भाषा  मले ,

तो  सबंधो  ना  साचा  खुलासा  मले.

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