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Saturday, September 3, 2016

*जिंदगी भी हमें आजमाती रही और हम भी उसे आजमाते रहे*

अजनबी शहर के अजनबी रास्ते मेरी तन्हाई पर मुस्कुराते रहे;
मैं बहुत देर तक यूँ ही चलता रहा, तुम बहुत देर तक याद आते रहे।
कल कुछ ऐसा हुआ मैं बहुत थक गया, इसलिये सुन के भी अनसुनी कर गया;
कितनी यादों के भटके हुए कारवाँ मेरे जेहन के दर खटखटाते रहे!
जहर मिलता रहा जहर पीते रहे, रोज मरते रहे रोज जीते रहे;
जिंदगी भी हमें आजमाती रही और हम भी उसे आजमाते रहे

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