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Saturday, September 3, 2016

*नादान है कितनी वो कुछ समझती ही नहीं, सीने से लगाकर पूछती है की धड़कन इतनी तेज़ क्यूँ है !!*

यादें क्यों नहीं बिछड़ जाती केके ??,
लोग तो पल में बिछड़ जाते है !!

MR...SHAYAR

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तुम ने तो फिर भी सीख लिया ज़माने के साथ जीना,
.
हम तो कुछ भी न कर सके तुझे चाहने के सिवा...

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कमाल का ताना देती है वो अक्सर मुझे,

कि लिखते तो खूब हो.. समझा भी दिया करो !!!!

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नजरे जो मिलेगे उनसे तो पूंछेंगे अंजामें इश्क़..

KK..

नही तो झुकी नजरो को सलाम करेंगे
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सब वख्त के इंतजार में रहते हैं...
मैंने वख्त को थामा हैं...
तेरे इंतजार में...

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जब से उसने पूछा है कौन हो तुम ...?
.
तब से मुझे ही नहीं पता ... कौन हूँ मैं ...?

MR...KK
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मुझे किसी के बदल जाने का गम नही है..
बस कोई था जिस पर खुद से भी ज्यादा भरोसा था..

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नादान है कितनी वो कुछ समझती ही नहीं,

सीने से लगाकर पूछती है की धड़कन इतनी तेज़ क्यूँ है !!

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मै फिर से गिरूँगा ये ग़लतफ़हमी दूर कर लो...!!

वो दिल की गलती थी की हम लडखडा से गए थे..!"

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