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Monday, September 5, 2016

*शायरी से भरे पन्नों को छूकर देखना कभी कोई दिल वहाँ भी धड़का करता है..*

अंदाज़ा दर्द का... कोई लगाए भी कैसे...

जब तलक तजुर्बा कोई अपना नहीं होता !!

MR...KK

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_तुझे भूलकर हम करें भी तो क्या_....

  --जानेमन

_इकलौता शौक है तू मेरी जिंदगी का_MR...KK

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प्यार तो तक़दीर में
लिखा होता है,

किसी के तड़पने से
कोई किसी का नही होता....

MR...KK

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किसपे ड़ाले ईल्जाम-ऐ-बर्बादी का हमारी ।।

घूम फिर के उंगली खुद के दिल पे आती हैं..

MR...KK

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कैसे बेवफा कहूं ,,,,
उस शख़्स को,,,,,,,
,,
दोस्तों
,,
साथ तो ये जिन्दगी
भी नही देगी ,,,,,,,

MR...KK
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कहाँ वफा का सिला देते हैं लोग,
अब तो मोहब्बत की सजा देते हैं लोग,
पहले सजाते हैं दिलो में चाहतों का ख्वाब
फिर ऐतबार को आग लगा देते हैं लोग

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उन्होंने वक़्त समझकर गुज़ार दिया हमको

और हम…

उनको ज़िन्दगी समझकर आज भी जी रहे हैं।

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कभी कभी मेरी आँखे यूँ ही रो पड़ती है
में इनको कैसे समझाऊ...
कि कोई शख्श
सिर्फ चाहने से अपना नहीं होता

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मेरे हाथों में इक शक्ल चाँद जैसी थी .

तुम्हे ये कैसे बतायें वो रात कैसी थी..

MR...KK

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