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Monday, September 5, 2016

*इजाजत तो उसने भी न दी थी हमे मोहब्बत की पगली शायरी पे वाह-वाह करती रही और हम तबाह होते गए*

दिल लगाकर तो देखो भले ना करना निक़ाह तुम।

एक बार करो तो सही मोहब्बत का गुनाह तुम

MR...KK

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बड़े अजीब तरीके से मेरा कत्ल करवाया गया

सुई से जख्म दिये और तलवार से मरहम लगाया गया         *.........*

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बहाना कोई ना बनाओ तुम मुझसे ख़फ़ा होने का,

तुम्हें चाहने के अलावा कोई गुनाह नहीं है मेरा,

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रंगों से बनाई जीवन की रंगोली
सितारों से हर शाम सजाई
मेंरे मुखड़े के दीदार को उसने ,ज़माने को दी मुँह दिखाई..

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हमने कब माँगा है तुमसे वफाओं का सिलसिला..! बस दर्द देते रहा करो मोहब्बत बढ़ती जायेगी..!

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बिछड़कर फिर मिलोगे यकीन कितना था,,,,,
बेशक ख्वाब था मगर हसीन कितना था

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दर्द सहने की इतनी
आदत सी हो गई हैं कि
अब दर्द ना मिले तो दर्द सा होता हैं!!

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वो तब भी थी, अब भी है और हमेशा ही रहेगी ..
ये मोहब्बत है …..
कोई तालीम नहीं जो पूरी हो जाएं ..!!
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लोग अक्सर मुझसे कहते हैं कि,
बदल गये हो तुम मैं मुस्कुरा कर,
कहता हूँ कि 'टूटे हुये फूलों' का रंग,
अक्सर बदल जाया करता ह..........

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जिस्मों की चाहत ने ,,
इश्क़ को बदनाम कर दिया ,,
वरना
इश्क़ तो आज भी राधा और
श्याम को
ढूँढता है !

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मै वह हारा हुआ BADSHAH हु
जो सभी का दिल जीतने के बाबजूद भी
उसका DIL न जीत सका  जिनसे हम बेहद प्यार करते हैं..

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ANUKRAMANIKA