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Wednesday, November 23, 2016

*कभी तो मेरी ख़ामोशी का मतलब खुद समझ लो, कब तक वजह पूछोगे अंजानो की तरह !!*

कभी तो मेरी ख़ामोशी का मतलब खुद समझ लो,
कब तक वजह पूछोगे अंजानो की तरह !!

वास्ता नही रखना तो फिर मुझपे नजर क्यूं रखती है … मैं किस हाल में जिंदा हूँ … तू ये सब खबर क्यूं रखती है …. “#”

कहाँ तलाश करोगे तुम मेरे जैसा इंसान,

जो तुमसे जुदा भी रहे और बेइंतहा मोहब्बत भी करे !!😢😢

वक्त मिले कभी तो कदमों तले भी देख लेना बेकसूर अक्सर वहीं पाये जाते हैं !!

मैं मोहब्बत करता हूँ तो टूट कर करता हुँ…
ये काम मुझे जरूरत के मुताबिक नहीं आता….

ये बारिश , ये हसीन मौसम , और ये हवाए....

लगता है , आज मोहब्बत ने किसी का साथ दिया है..!!

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Monday, October 3, 2016

*खुद की तरक्की में इतना समय लगा दो...*

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
खुद की तरक्की में इतना
      समय लगा दो
की किसी ओर की बुराई
   का वक्त ही ना मिले......
"क्यों घबराते हो दुख होने से,
जीवन का प्रारंभ ही हुआ है रोने से..
नफरतों के बाजार में जीने का अलग ही मजा है...
लोग "रूलाना" नहीं छोडते...
और हम "हसना" नहीं छोडते..
  🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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Monday, September 5, 2016

*मुनाफे की बात नहीं होती हमारे कारोबार में,* *हम आईना बेचा करते हैँ अंधों के बाजार में.*

तेरी बेवफाई ने मेरा

ये हाल कर दिया है;
मैं नहीं रोता

लोग मुझे देख कर रोते हैं!

PAGAL SHAYAR
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कुछ लोग आते है जिंदगी में,
सिर्फ हमें रुलाने के लिये !!

MR...KK

⬇⬇

शायद उसने दरिया में ड़ाल दी होगी,
मेरी मोहब्बत भी तो  एक नेकी ही थी !!

⬇⬇

उस पे मुहब्बत आती हे ऎसे...
जूठ पे यकींन आता हे जेसे..

MR...KK

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कोई मेरी आवाज को खामोश कर गया,,,
____🌹_🌹_🌹___
तब से मे बोलता नही
सिर्फ लिखता हूँ__

SHAYAR...KK

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_*कौन कहता है पैसा,*_

_*सबकुछ खरीद सकता है...!!!*_

_*दम है तो टूटे हुएँ,*_

_*विश्वास को पाकर दिखाएँ...!!!  MR..KK✍*

⬇⬇

मेरी शायरियों से मशहूर है तू इस क़दर मेरे शहर में......!!
.
दीदार किसी ने किया नहीं मगर,,,,, तारीफें हर ज़ुबान पर हैं.......!!!

MR...SHAYAR
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काश कुछ ऐसे सिलसिले हो जाए,
हम मिट जाए या फांसले मिट जाए ...

MR...KK

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काश जिन्दगी में मौत यूँ आए,
बाहों में तेरे सिर हो और मेरी रुह चली जाए ...

MR...KK

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काश मेरा दिल भी पत्थर का होता,
कितनी भी चोट लगे असर ना होता ...

MR...KK
⬇⬇
काश ये पल थम जाए,
और आपके हम हो जाए ...

MR...KK
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शतरंज में वज़ीर ओर ज़िंदगी में ज़मीर
     
अगर मर जाये तो, समझना खेल ख़त्म

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*इजाजत तो उसने भी न दी थी हमे मोहब्बत की पगली शायरी पे वाह-वाह करती रही और हम तबाह होते गए*

दिल लगाकर तो देखो भले ना करना निक़ाह तुम।

एक बार करो तो सही मोहब्बत का गुनाह तुम

MR...KK

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बड़े अजीब तरीके से मेरा कत्ल करवाया गया

सुई से जख्म दिये और तलवार से मरहम लगाया गया         *.........*

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बहाना कोई ना बनाओ तुम मुझसे ख़फ़ा होने का,

तुम्हें चाहने के अलावा कोई गुनाह नहीं है मेरा,

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रंगों से बनाई जीवन की रंगोली
सितारों से हर शाम सजाई
मेंरे मुखड़े के दीदार को उसने ,ज़माने को दी मुँह दिखाई..

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हमने कब माँगा है तुमसे वफाओं का सिलसिला..! बस दर्द देते रहा करो मोहब्बत बढ़ती जायेगी..!

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बिछड़कर फिर मिलोगे यकीन कितना था,,,,,
बेशक ख्वाब था मगर हसीन कितना था

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दर्द सहने की इतनी
आदत सी हो गई हैं कि
अब दर्द ना मिले तो दर्द सा होता हैं!!

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वो तब भी थी, अब भी है और हमेशा ही रहेगी ..
ये मोहब्बत है …..
कोई तालीम नहीं जो पूरी हो जाएं ..!!
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लोग अक्सर मुझसे कहते हैं कि,
बदल गये हो तुम मैं मुस्कुरा कर,
कहता हूँ कि 'टूटे हुये फूलों' का रंग,
अक्सर बदल जाया करता ह..........

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जिस्मों की चाहत ने ,,
इश्क़ को बदनाम कर दिया ,,
वरना
इश्क़ तो आज भी राधा और
श्याम को
ढूँढता है !

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मै वह हारा हुआ BADSHAH हु
जो सभी का दिल जीतने के बाबजूद भी
उसका DIL न जीत सका  जिनसे हम बेहद प्यार करते हैं..

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*शायरी से भरे पन्नों को छूकर देखना कभी कोई दिल वहाँ भी धड़का करता है..*

अंदाज़ा दर्द का... कोई लगाए भी कैसे...

जब तलक तजुर्बा कोई अपना नहीं होता !!

MR...KK

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_तुझे भूलकर हम करें भी तो क्या_....

  --जानेमन

_इकलौता शौक है तू मेरी जिंदगी का_MR...KK

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प्यार तो तक़दीर में
लिखा होता है,

किसी के तड़पने से
कोई किसी का नही होता....

MR...KK

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किसपे ड़ाले ईल्जाम-ऐ-बर्बादी का हमारी ।।

घूम फिर के उंगली खुद के दिल पे आती हैं..

MR...KK

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कैसे बेवफा कहूं ,,,,
उस शख़्स को,,,,,,,
,,
दोस्तों
,,
साथ तो ये जिन्दगी
भी नही देगी ,,,,,,,

MR...KK
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कहाँ वफा का सिला देते हैं लोग,
अब तो मोहब्बत की सजा देते हैं लोग,
पहले सजाते हैं दिलो में चाहतों का ख्वाब
फिर ऐतबार को आग लगा देते हैं लोग

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उन्होंने वक़्त समझकर गुज़ार दिया हमको

और हम…

उनको ज़िन्दगी समझकर आज भी जी रहे हैं।

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कभी कभी मेरी आँखे यूँ ही रो पड़ती है
में इनको कैसे समझाऊ...
कि कोई शख्श
सिर्फ चाहने से अपना नहीं होता

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मेरे हाथों में इक शक्ल चाँद जैसी थी .

तुम्हे ये कैसे बतायें वो रात कैसी थी..

MR...KK

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Saturday, September 3, 2016

*हम "मेहमान" नहीं* *"रौनके" "महफिल" हैं,* *"मुद्दतों" तक "याद" करोगे कि,* *"ज़िन्दगी" में कोई "आया" था...*

*_____________#KK* ❤

_*✍🏽🌹यादों का जहर दिल में फ़ैल गया,*_

_*देर कर दी शायद मैंने उसे भुलाने में !!✍🏽🌹*_

*KinG OF SHAYAR✍🏽*

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गंगा स्नान तो गरीबो के लिए हैं साहब . . .
अमीरों के पाप तो
"High Court"
और
"supreme court"
धोता है

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“खुश रहने का मतलब यह नहीं कि सब कुछ उत्तम है। इसका मतलब है कि आपने कमियों से ऊपर उठने का निर्णय कर लिया है।”

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_*शाखा से तोड़े गएँ,*_

_*फूल ने हँस कर,*_

_*ये कहाँ...!!!*_

_*अच्छाँ होना भी,*_

_*बुरी बात है,*_

_*इस दुनियाँ में...!!!*_

MR...KK

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*हम "मेहमान" नहीं*
   *"रौनके" "महफिल" हैं,*

*"मुद्दतों" तक "याद" करोगे कि,*
    *"ज़िन्दगी" में कोई "आया" था...*

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ना आंखों में छुपती है ना होठों मे दबती है
ये मोहब्बत जनाब शोर बहुत करती है...

KING OF KK

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*नादान है कितनी वो कुछ समझती ही नहीं, सीने से लगाकर पूछती है की धड़कन इतनी तेज़ क्यूँ है !!*

यादें क्यों नहीं बिछड़ जाती केके ??,
लोग तो पल में बिछड़ जाते है !!

MR...SHAYAR

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तुम ने तो फिर भी सीख लिया ज़माने के साथ जीना,
.
हम तो कुछ भी न कर सके तुझे चाहने के सिवा...

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कमाल का ताना देती है वो अक्सर मुझे,

कि लिखते तो खूब हो.. समझा भी दिया करो !!!!

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नजरे जो मिलेगे उनसे तो पूंछेंगे अंजामें इश्क़..

KK..

नही तो झुकी नजरो को सलाम करेंगे
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सब वख्त के इंतजार में रहते हैं...
मैंने वख्त को थामा हैं...
तेरे इंतजार में...

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जब से उसने पूछा है कौन हो तुम ...?
.
तब से मुझे ही नहीं पता ... कौन हूँ मैं ...?

MR...KK
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मुझे किसी के बदल जाने का गम नही है..
बस कोई था जिस पर खुद से भी ज्यादा भरोसा था..

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नादान है कितनी वो कुछ समझती ही नहीं,

सीने से लगाकर पूछती है की धड़कन इतनी तेज़ क्यूँ है !!

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मै फिर से गिरूँगा ये ग़लतफ़हमी दूर कर लो...!!

वो दिल की गलती थी की हम लडखडा से गए थे..!"

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*लागणी ने ह्रदय नी जो भाषा मले , तो सबंधो ना साचा खुलासा मले.*

लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं

मैं न जुगनू हूँ, दिया हूँ न कोई तारा हूँ
रोशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यों हैं

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मुहब्बत का ही नहीं अमीरी का भी निशां है ताजमहल
ये बात और है कि प्यार तो मुफ़लिस भी किया करते हैं........

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दिल जित ले वो नजर हम भी रखते है,
भीड़ में नजर आये वो असर हम भी रखते है,
यु तो वादा किया है किसीसे मुस्कुराने का वरना आँखों में समंदर हम भी रखते है|

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दिल की हर बात ज़माने को बता देते है
अपने हर राज़ से परदा उठा देते है
चाहने वाले हमे चाहे या ना चाहे
हम जिसे चाहते है उस पर ‘जान’ लूटा देते है.....

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दिल की हर बात ज़माने को बता देते है
अपने हर राज़ से परदा उठा देते है
चाहने वाले हमे चाहे या ना चाहे
हम जिसे चाहते है उस पर ‘जान’ लूटा देते है.....

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कामयाबी कभी बड़ी नही होती,
पाने वाले हमेशा बड़े होते है.
दरार कभी बड़ी नही होती,
भरने वाले हमेशा बड़े होते है.
इतिहास के हर पन्ने पर लिखा है,
दोस्ती कभी बड़ी नही होती,
निभाने वाले हमेशा बड़े होते है…

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सब्र ....तहजीब है मोहब्बत की...!

और तुम समझते हो बेजुबान हूँ मैं...!!

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लागणी  ने  ह्रदय नी   जो भाषा  मले ,

तो  सबंधो  ना  साचा  खुलासा  मले.

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*जी चुका उनके लिए जो मेरे लिए सब् कुछ थे अब जीना है उनके लिए जिनके लिए मैं सब् कुछ हूं।।*

हर हसरत अगर पूरी हो जाये तो ,ये जिंदगी ही क्या...

वक्त काटने का एक जरिया तो ये नाकाम हसरतें ही हैं...

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साँपों के मुक़द्दर में अब वो ज़हर कहाँ ?
जो इन्सान आजकल बातों में उगल देते हैं !

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खुद को पढता हूँ, फिर छोड़ देता हूँ,

रोज़ ज़िन्दगी का एक पन्ना मोड़ देता हूँ…

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तुम ये मत समझना के मुझे कोई और नहीं चाहता,

मौत तो तुमसे पहेले ही हमसफ़र बन बैठी है..

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क्यूँ  एक  दिल  को  दूसरे  दिल  की खबर न हो ।

वो दर्द-ए-इश्क  ही क्या जो इधर हो, उधर न हो ।।

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तुझे देख कर मेरे शहर के पत्थर भी पिघल जाते है 
यू नज़रो से कत्ल करने के तरीके बस तुम्है आते है

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तेरी  मुस्कराहट तेरे रूप की पहचान है,
तेरे दिल की धड़कन में दिल की जान है,

ना सुनूं जिस दिन तेरी बातें,
लगता है उस रोज़ ये जिस्म बेजान है।

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जी चुका उनके लिए जो मेरे लिए सब् कुछ थे
अब जीना है उनके लिए जिनके लिए मैं सब् कुछ हूं।।

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ऐ खुदा उसे मेरा कर दे या फिर मोहब्बत का जख्म भर दे
मुझे समझ नही आती तेरी खुदाई बस मेरा इश्क अमर कर दे

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अजनबी शहर के अजनबी रास्ते मेरी तन्हाई पर मुस्कुराते रहे;
मैं बहुत देर तक यूँ ही चलता रहा, तुम बहुत देर तक याद आते रहे।
कल कुछ ऐसा हुआ मैं बहुत थक गया, इसलिये सुन के भी अनसुनी कर गया;
कितनी यादों के भटके हुए कारवाँ मेरे जेहन के दर खटखटाते रहे!
जहर मिलता रहा जहर पीते रहे, रोज मरते रहे रोज जीते रहे;
जिंदगी भी हमें आजमाती रही और हम भी उसे आजमाते रहे

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*रिश्तो को सम्भालते-सम्भालते थकान सी होने लगी हैँ रोज कोई ना कोई नाराज हो जाता हैँ*

करता   हैं   मेरे   ज़ख्म   का . . .

.    .    .    .    कमबख्त   वो   खूब   इलाज . . .

कुरेद   कर   देख   लेता   है . . .

.    .    .    .    और   कहता   है   वक्त   लगेगा . !

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देखो दिल तुम बीच में मत  आना,
आज हमारी

उनसे लडाई हैं....

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मैंने उसका हाथ थमा था राह दिखने को,

अब ज़माने को दर्द हुआ तो मैं क्या करूँ ?

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है कोई जो करेगा ,,,,,,, रफूगरी मेरी......

इश्क खा गया है ,, जगह जगह से मुझे....!!

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हाँ अब कम लिखता हूँ...!!!
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नुमाइश गम की हो या जख्म की, अच्छी नही होती..
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सफ़र लिख दे, रास्ता ही लिख दे ।
किसी मंज़िल से, मेरा वास्ता ही लिख दे ।।

ऐसा क्यूँ है, के बेमक़सद जिए जा रहा हूँ मैं ।
मेरी क़िस्मत में, कोई हादसा ही लिख दे ।।
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तेरी दुआओ का दस्तुर भी अजब है,

मेरे मौला मुहबबत उन्ही को मिलती है,

जिन्हे निभानी नही आती ।”
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रिश्तो को सम्भालते-सम्भालते थकान सी होने लगी हैँ
रोज कोई ना कोई नाराज हो जाता हैँ
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कहीं बैठी वो मेरा ज़िक्र कर,मुस्कुरा रही होगी......
ये हिचकी सुबह से,यूँ ही तो नहीं आ रही होगी.....।।।।

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भोले से चहरे पर, वो प्यारी सी मुस्कान, दीवाना बना ही देती है
कैसे संभाले खुद को, आँखे उनका दीदार कराही देती है
दे दी जन्नत की सारी खूबियाँ इनको, तो भी शिकवा नहीं तुझसेगम है की हमें क्यों दे दिया दिल और क्यों दी आँखे हुस्न-ऐ-दीदार को

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